Tejas Fighter Jet Crash: भारतीय वायुसेना का स्वदेशी तेजस दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित

तेजस LCA दुर्घटना: भारतीय वायुसेना को एक और झटका, लेकिन पायलट सुरक्षित

Tejas Fighter Jet Crash


भारतीय वायुसेना को एक बार फिर उस समय बड़ा झटका लगा जब स्वदेशी तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) एक दुर्घटना का शिकार हो गया। यह हादसा एक प्रमुख एयर बेस पर नियमित प्रशिक्षण उड़ान के बाद लैंडिंग के दौरान हुआ। राहत की बात यह रही कि पायलट ने समय रहते सुरक्षित रूप से इजेक्ट कर लिया और उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई।

हालांकि, दुर्घटना में विमान को भारी नुकसान पहुंचा है और प्रारंभिक आकलन के अनुसार इसे सेवा से बाहर किया जा सकता है। इस घटना के बाद भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल बेड़े में शामिल तेजस सिंगल-सीट विमानों की संख्या में कमी आना तय माना जा रहा है। यह तेजस कार्यक्रम से जुड़ी तीसरी बड़ी दुर्घटना है, जिसने इसके संचालन और रखरखाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वदेशी ताकत का प्रतीक है तेजस

तेजस भारत का प्रमुख स्वदेशी फाइटर जेट है, जिसे पुराने लड़ाकू विमानों की जगह लेने और आधुनिक मल्टीरोल क्षमताएं प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह विमान आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक अहम स्तंभ माना जाता है।

वर्तमान में तेजस के 32 सिंगल-सीट वैरिएंट भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे हैं। इस विमान ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में शानदार प्रदर्शन कर अपनी क्षमता साबित की है। तेजस को हल्का, फुर्तीला और आधुनिक एवियोनिक्स से लैस फाइटर जेट माना जाता है।

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हालिया हादसा कैसे हुआ

सूत्रों के मुताबिक, यह दुर्घटना लैंडिंग के अंतिम चरण में हुई। जब विमान रनवे के करीब था, उसी दौरान किसी तकनीकी या ऑपरेशनल समस्या के चलते संतुलन बिगड़ गया। पायलट ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत इजेक्शन का फैसला लिया, जिससे उनकी जान बच गई।

भारतीय वायुसेना ने इस हादसे के बाद कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पूरे तेजस बेड़े की व्यापक तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बाकी विमान पूरी तरह सुरक्षित हैं।

पहले भी हो चुके हैं हादसे

तेजस कार्यक्रम से जुड़े पिछले हादसों पर नजर डालें तो मार्च 2024 में राजस्थान के जैसलमेर के पास एक तेजस विमान फायरपावर डेमोंस्ट्रेशन के बाद लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस दौरान भी पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा था।

इसके बाद नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान एरोबेटिक प्रदर्शन करते समय एक तेजस क्रैश हो गया था। इन दोनों घटनाओं के बाद सुरक्षा प्रक्रियाओं और ऑपरेशनल गाइडलाइंस को और सख्त किया गया था।

Mk1A डिलीवरी में देरी

तेजस के उन्नत Mk1A वैरिएंट को लेकर पहले से ही डिलीवरी में देरी हो रही है। इंजन आपूर्ति, उत्पादन क्षमता और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण HAL को समय-सीमा में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं कार्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।

पायलट सुरक्षा बनी बड़ी ताकत

इस हादसे में सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि तेजस का इजेक्शन सिस्टम पूरी तरह सफल रहा। यह एक बार फिर साबित करता है कि विमान में लगाए गए सुरक्षा फीचर्स अत्यंत प्रभावी हैं। हाई-परफॉर्मेंस सैन्य विमानों में जोखिम हमेशा रहता है, लेकिन मजबूत सुरक्षा सिस्टम पायलटों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

तेजस LCA की यह दुर्घटना निस्संदेह चिंता का विषय है, लेकिन इसे पूरे स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रम की विफलता के रूप में देखना सही नहीं होगा। हर हादसे से मिलने वाले अनुभव भविष्य में सुरक्षा, प्रशिक्षण और तकनीकी सुधारों में मदद करते हैं।

भारतीय वायुसेना और HAL ने भरोसा दिलाया है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में तेजस कार्यक्रम आज भी बेहद महत्वपूर्ण है और आने वाले वर्षों में यह भारत की हवाई शक्ति को और मजबूत करेगा।

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