ऑपरेशन रोरिंग लायन: इजरायल-ईरान युद्ध में Epic Fury और ट्रंप का बड़ा संकेत

ऑपरेशन रोरिंग लायन: इजरायल-ईरान युद्ध में Epic Fury और ट्रंप का बड़ा संकेत
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ऑपरेशन रोरिंग लायन: इजरायल और अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, क्या है असली मकसद?

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर है। इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपने नए सैन्य अभियान को “ऑपरेशन रोरिंग लायन” नाम दिया है। इससे पहले जून में हुए हमले को “राइजिंग लायन” कहा गया था। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार यह ऑपरेशन सीधे तौर पर ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को निशाना बना रहा है।

इधर अमेरिका ने भी अपने सैन्य अभियान को “Epic Fury” नाम दिया है, जिसका अर्थ है “भीषण क्रोध”। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि यह केवल सीमित हमला नहीं बल्कि एक बड़ा और लगातार चलने वाला ऑपरेशन है।

न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करने की रणनीति

इस ऑपरेशन का सबसे बड़ा उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना बताया जा रहा है। हमलों का फोकस यूरेनियम संवर्धन केंद्रों, रिसर्च सुविधाओं और परमाणु बुनियादी ढांचे पर है। अमेरिका और इजरायल का दावा है कि वे ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना चाहते हैं।

बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर वार

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को “मिट्टी में मिलाना” इस ऑपरेशन का अहम हिस्सा है। इजरायल लंबे समय से ईरान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता रहा है। इसीलिए मिसाइल लॉन्च साइट्स और उत्पादन इकाइयों को प्राथमिक लक्ष्य बनाया गया है।

प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक का दावा

इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने इसे “प्री-एम्प्टिव” यानी एहतियाती हमला बताया है। उनका कहना है कि ईरान की तरफ से संभावित बड़े हमले की आशंका को देखते हुए पहले ही कार्रवाई की गई है, ताकि इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ईरानी नौसेना और खाड़ी क्षेत्र

अमेरिका ने साफ किया है कि फारस की खाड़ी और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर ईरान के प्रभाव को खत्म करना भी इस अभियान का हिस्सा है। ईरान की नौसेना और समुद्री ठिकानों को निशाना बनाकर क्षेत्रीय दबदबे को तोड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।

क्षेत्रीय वर्चस्व पर प्रहार

इजरायल और अमेरिका दोनों का मानना है कि ईरान समर्थित समूह जैसे हमास, हिजबुल्लाह, इस्लामिक जिहाद और हूती विद्रोही क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाते हैं। इन संगठनों को मिलने वाली सैन्य और आर्थिक सहायता की सप्लाई चेन को तोड़ना इस ऑपरेशन का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

IRGC पर सीधा निशाना

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को इजरायल अपने लिए सबसे बड़ा खतरा बताता रहा है। इस ऑपरेशन के तहत IRGC के ठिकानों, कमांड संरचना और संसाधनों को निशाना बनाया जा रहा है ताकि उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सके।

क्या लक्ष्य है शासन परिवर्तन?

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में ईरानी जनता से अपील की है कि “जब हम काम पूरा कर लें तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लेना।” इस बयान ने साफ संकेत दिया है कि यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान ईरान में सत्ता परिवर्तन की दिशा में भी कदम हो सकता है।

अमेरिका का सुरक्षा तर्क

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वे अपने नागरिकों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए “आसन्न खतरों” को खत्म कर रहे हैं। ट्रंप ने ईरान को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए प्रत्यक्ष खतरा बताया है।

क्या लंबी चलेगी यह जंग?

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने कई दिनों तक चलने वाले हमलों की योजना बनाई है। इसका मतलब है कि यह संघर्ष अल्पकालिक नहीं बल्कि लंबा खिंच सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इसे “बहुत बड़ा और लगातार चलने वाला ऑपरेशन” बताया है।

मध्य पूर्व पर असर

अगर यह टकराव लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों पर पड़ेगा। चीन और रूस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि ईरान इनके साथ करीबी संबंध रखता है।

कुल मिलाकर “ऑपरेशन रोरिंग लायन” और “Epic Fury” केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति और शक्ति संतुलन को बदलने की कोशिश मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह अभियान सीमित रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेगा।

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