US-Iran तनाव से Wall Street में 1% से ज्यादा गिरावट, शेयर बाजार में मचा हड़कंप

US-Iran तनाव से Wall Street में भारी गिरावट, शेयर बाजार में Risk-Off माहौल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट के प्रमुख इंडेक्स सोमवार को 1 प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ खुलने के संकेत दे रहे हैं। निवेशकों में डर का माहौल है और वे जोखिम भरी संपत्तियों से दूरी बना रहे हैं।

Wall Street क्यों गिरा

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका ने बाजार में Risk-Off Sentiment को जन्म दिया है। प्री-मार्केट ट्रेडिंग में Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq जैसे प्रमुख इंडेक्स दबाव में नजर आए।

जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या भू-राजनीतिक संकट गहराता है, तब निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि वॉल स्ट्रीट में तेज गिरावट दर्ज की गई।

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तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता

US-Iran तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 10 प्रतिशत से अधिक उछल गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है।

तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। ईंधन महंगा होने से परिवहन, उद्योग और आम उपभोक्ता सभी प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव और तेज हो गया है।

किन सेक्टर्स पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?

इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान एयरलाइन और ट्रैवल सेक्टर को हुआ है। मध्य पूर्व के कई इलाकों में हवाई सेवाएं बाधित होने की आशंका से एयरलाइन कंपनियों के शेयर टूट गए।

बैंकिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। इसके विपरीत डिफेंस और एनर्जी सेक्टर के शेयरों को कुछ हद तक सपोर्ट मिला, क्योंकि ऐसे हालात में इन सेक्टर्स की मांग बढ़ जाती है।

वैश्विक बाजारों पर भी दिखा असर

अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का असर एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों पर भी पड़ा। जापान, चीन और यूरोप के प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। निवेशकों ने नए निवेश से दूरी बनाते हुए सतर्क रुख अपनाया।

भारतीय शेयर बाजार में भी इसका असर देखने को मिला, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक शेयर बाजारों में अस्थिरता रहने की संभावना है।

निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और लॉन्ग टर्म रणनीति पर ध्यान दें। सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोना और बॉन्ड की ओर झुकाव फिलहाल बढ़ सकता है।

US-Iran संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। वॉल स्ट्रीट में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट, तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक बाजारों में कमजोरी इस बात का संकेत है कि निवेशकों को आने वाले दिनों में सतर्क रहना होगा। जब तक स्थिति साफ नहीं होती, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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